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Walking Exercise Benefits in hindi


सुबह के वक्त करे ये काम तो आलस्य के साथ-साथ कई बीमारियां रहेंगी दूर

हम सुबह-सुबह उठते ही अपनी दैनिक दिनचर्या में लग जाते हैं और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दिए बिना अपने रोजमर्रा के काम शुरू कर देते हैं।

एक रिचर्स के अनुसार हर आदमी को एक सप्ताह में 3 घंटे मॉर्निंग वॉक करनी चाहिए यानि एक दिन में करीब 20 मिनट। हम सुबह-सुबह उठते ही अपनी दैनिक दिनचर्या में लग जाते हैं और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दिए बिना अपने रोजमर्रा के काम शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर सुबह- सुबह सभी काम छोड़कर 15-20 मिनट सैर करने यानि मॉर्निंग वॉक पर जाए तो आपका पूरा दिन तो अच्छा रहेगा ही, साथ ही कई बीमारियां आपसे दूर रहेगी। एक रिचर्स के अनुसार हर आदमी को एक सप्ताह में 3 घंटे मॉर्निंग वॉक करनी चाहिए यानि एक दिन में करीब 20 मिनट। आइए जानते हैं ऐसा करने से शरीर को क्या फायदा होगा। हेल्दी रखने में कारगर- शरीर को स्वस्थ्य रखने में मॉनिंग वॉक सबसे ज्यादा मदद करती है। यह एक एरोबिक फिटनेस का तरीका है जिसे करने में आपको कोई जिम जॉइन करने की या ट्रेनर रखने की जरुरत नहीं है। अगर आप कुछ दिन मॉर्निंग वॉक पर जाएंगे तो कुछ दिन बाद आप खुद अपने शरीर में बदलाव देखना शुरू कर देंगे। इससे एक-दो नहीं बल्कि कई फायदे होते हैं। वजन नियंत्रण करता है- मॉर्निंग वॉक के जरिए आप अपने वजन को कंट्रोल भी कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि बिना डाइट में बदलाव किए भी आप वजन घटा सकते हैं, इसके लिए आपको 45 मिनट मॉर्निंग वॉक पर जाने की जरुरत है। चलने से आपकी हर्ट रेट बढ़ती है और उससे कई कैलोरी बर्न होती है जिससे आपका वजन खुद ही कम होने लगता है। डायबिटिज के लिए असरदार- जिन लोगों को डायबिटिज की शिकायत होती है उनके लिए मॉर्निंग वॉक किसी दवा से कम नहीं है। मॉर्निंग वॉक से अधिक से अधिक इंसूलिन का यूटिलाइजेशन होता है और उससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है जिससे डायबिटीज होने का खतरा कम हो जाता है। अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं या डायबिटीज से बचना चाहते हैं तो हर रोज घूमना शुरू कर दें। दिल के लिए फायदेमंद- कई शोध में सामने आया है कि हर रोज करीब आधा घंटा सैर करने से दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है। जब आप चलते हैं तो आपकी हर्ट रेट बढ़ती है और दिल की स्ट्रैंथ भी बढ़ती है, जिससे ब्लड का सर्कुलेशन तेज होता है और इससे आपका दिल हेल्दी रहता है। कई अन्य लाभ- वैज्ञानिकों का कहना है कि हर रोज आधे घंटे घूमने से आपकी लाइफ 1.4 साल तक बढ़ सकती है और मॉर्निंग वॉक से प्रेग्नेंसी के वक्त भी काफी आराम मिलता है और गर्भपात का खतरा टल जाता है। साथ ही मॉर्निंग वॉक से पूरे दिन शरीर में फुर्ती रहती है और पेट की कई समस्याएं भी दूर होती है।

नोट:


आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें ।

Slim And fit for Tips in hindi


स्लिम और फिट के लिये आजमाएं ये टिप्‍स

स्लिम और फिट व्‍यक्ति को देखकर आपको भी थोड़ी बहुत ईर्ष्‍या तो जरूर होती होगी। आपके मन में भी होता होगा कि आप भी क्‍यों न फिट रहें। तो अगर आप भी स्लिम-ट्रिम और फिट दिखना चाहते हैं? तो इन 5 टिप्‍स को अजमाइए और स्‍वस्‍थ्‍य जीवन पाइए।


1-ब्रेकफास्‍ट में शामिल करें ये फूड


फिट रहने वाले प्रतिदिन सुबह ब्रेकफास्‍ट जरूर करते हैं। नाश्‍तें में दही, फ्रूट जूस, अंडे, बादाम आदि का को शामिल करें। यह आपको पूरे दिन ताकत मिलेगी और आप फिट रहेंगे। खाने में प्रोटीन युक्‍त फूड का सेवन आपकी मसल्‍स को बनाएगा और स्लिम रखेगा।

2-खाने में लें हाईफाइबर फूड


स्लिम-ट्रिम और फिट रहने के लिए ऑयली चीजों के बजाए हाईफाइबर फूड लेना चाहिए। पत्‍तागोभी, फूलगोभी, पालक, मेथी, चना, मूंग आदि फूड फाइबर युक्‍त होते हैं। ऐसे आहार का सेवन जरूर करना चाहिए।

3-ग्रीन टी या ब्‍लैक कॉफी


फिट रहने वाले लोग सुबह की चाय में दूध और शक्‍कर को अवॉइड करते हैं, इसकी जगह ब्‍लैक कॉफी या ग्रीन टी लेते हैं। इस बॉडी बॉडी मेनटेन रहती है। इसके अलावा शरीर को डिटॉक्‍स करने के लिए पानी का भरपूर सेवन करें।

4-लें भरपूर नींद


अगर आप जिम करते हैं या कोई भी शारीरिक मेहनत करते हैं तो भी भरपूर नींद लेना जरूरी होता है। कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन्‍स का लेवल कम होता है।

5-रेगुलर एक्‍सरसाइज


फिट रहने के लिए प्रतिदिन एक्‍सरसाइज जरूर करना चाहिए। इससे शरीर का ब्‍लड सर्कुलेशन सही रहेगा। इसके अलावा तनाव मुक्‍त रहने के लिए योग, प्रणायाम करें। अगर आप फिट रहना चाहते हैं तो इन टिप्‍स को जरूर अपनाएं।

नोट:

आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें ।

how to get Body Strength in Hindi


बॉडी की स्ट्रेंथ के लिए जरूरी है रनिंग

जब सबसे पहले रनिंग की बात आती है तो आपके दिमाग में क्या बात आती है | कार्डियोवस्कुलर एक्टिविटी यानि हार्ट और लंग्स की एक्सरसाइज| लेकिन इसके अलावा भी रनिंग का मतलब बोन, ज्वॉइंट्स, लिगमेंट्स और मसल्स की स्ट्रेंथ बढ़ाना है|

इंजरी होने पर रनिंग बंद करना नहीं है बेस्ट तरीका

रनिंग इंजरी में आमतौर पर बैड बैक्स, बैड नीज़, एंकल स्प्रेन होता है| जब भी रनिंग के दौरान आपको ये दिक्कतें आती हैं तो डॉक्टर्स रनिंग स्टॉ़प करने के लिए कह देते हैं| लेकिन रनिंग बंद करना बेस्ट तरीका नहीं है| रनिंग बंद करने से हार्ट और लंग्स हेल्दी नहीं रहेंगे|

रनिंग से ही संभव है बॉडी की स्ट्रेंथ वापिस लाना-

बोन, ज्वॉइंट्स, लिगमेंट्स और मसल्स की अपनी काम करने की क्षमता है| इन्हें ट्रेंड होने और स्ट्रेंथ बढ़ाने की जरूरत है जो कि रनिंग से संभव है|

गलत रनिंग के नुकसान-

आपने अक्सर नोट किया होगा जब आप रनिंग की शुरूआत करते हैं तो शुरूआत में तो आप धीमा दौड़ते हैं लेकिन आखिर के कुछ किलोमीटर आप बहुत तेज दौड़ते हैं| क्या आप जानते हैं ये रनिंग का सही तरीका नहीं है| ऐसा करने से बॉडी की स्ट्रेंथ नहीं बढ़ती| ऐसे में अपर बॉडी वीक होने लगती है| आपके कोलैप्स होने का डर भी रहता है| इसके अलावा लंग्‍स लंबे समय तक सपोर्ट नहीं कर पाते और बॉडी के अन्‍य पार्ट्स तक ऑक्सीजन ठीक से सरकुलेट नहीं हो पाती|

पैरों पर दौड़ने के लिए ना डालें दबाव-

जब पैर थक जाते हैं तो उन्हें अधिक स्ट्रेंथ और हेल्प की जरूरत होती है ताकि अपर बॉडी ठीक रहे| कई बार ऐसा होता है कि आप तेज दौड़ना चाहते हैं लेकिन पैर साथ नहीं देते लेकिन आपके हाथ तेजी से मूव करते हैं तो आपको पैरों पर दवाब डालना पड़ता है ताकि हाथों के मोमेंट से मैच कर सकें| जबकि ऐसा करने से इंजरी हो सकती है|

ये है दौड़ने का सही तरीका-

आपने प्रोफेशनल्स को देखा होगा कि जब अंतिम पड़ाव होता है तो वे स्पीड स्लो करके बॉडी को मैन्यूप्लेट करके बॉडी तिरछा कर दौड़ने लगते हैं| इससे अपर बॉडी धीरे मूव करती है और पैरों के मैचिंग बैठती है| यही दौड़ने का सही तरीका है|

अपर बॉडी स्ट्रेंथ है जरूरी-

अगर अपर बॉडी में स्ट्रेंथ नहीं है तो आप सही तरह से तेजी से नहीं दौड़ पाएंगे| अपर बॉडी में स्ट्रेंथ नहीं होने से ना सिर्फ चैस्ट कोलैप्स हो सकती है बल्कि लोबैक और नी पेन भी हो सकता है| बॉडी मे इंजरी हो सकती है|

मिड वे में होता है दर्द-

जब रनिंग के कारण घुटनों में दर्द होता है तो ये दौड़ने के र्स्टाटिंग या लास्ट में नहीं बल्कि मिड वे में होता है| ये सभी चीजें स्पाइन की स्टेबिलिटी पर डिपेंड करती हैं| स्पाइन की स्टेबिलिटी सही रनिंग से बढ़ाई जा सकती है|

नोट:

आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें|