लाल मिर्च खाने के ये नुकसान जानते हैं आप
लाल मिर्च पाउडर खाने से बेशक आपका मुंह जल जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं लाल मिर्च से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी हो सकती है ।
आज हम आपको कुछ ऐसी ही हेल्थ प्रॉब्लम्स के बारे में बताने जा रहे हैं ।
Indian Health Status- Health Care in Hindi by Aayurved and Medicine in Hindi
लाल मिर्च पाउडर खाने से बेशक आपका मुंह जल जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं लाल मिर्च से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी हो सकती है ।
आज हम आपको कुछ ऐसी ही हेल्थ प्रॉब्लम्स के बारे में बताने जा रहे हैं ।
जिन महिलाओं के बाल लगातार झड़ते हैं, उनमें गैर-कैंसर वाले ट्यूमर का खतरा बना रहता है । यह ट्यूमर गर्भाशय की दीवारों के भीतर होता है ।
जिन महिलाओं के बाल लगातार झड़ते हैं, उनमें गैर-कैंसर वाले ट्यूमर का खतरा बना रहता है । यह ट्यूमर गर्भाशय की दीवारों के भीतर होता है ।
सेंट्रल सेंट्रीफ्यूगल सिकेट्रिशियल एलोपेसिया (सीसीसीए) वाली महिलाओं में गर्भाशय के अंदर ट्यूमर का जोखिम पांच गुना अधिक होता है । एक नए शोध में यह पता चला है ।
फाइब्रॉएड गर्भाशय की दीवार पर पाए जाने वाले चिकनी पेशी के ट्यूमर हैं । वे गर्भाशय की दीवार के भीतर ही विकसित हो सकते हैं या इसके साथ जुड़े हो सकते हैं ।
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (HCFI) के अध्यक्ष पद्श्री डॉ । के के (K.K.) अग्रवाल ने कहा कि फाइब्रॉएड गर्भाशय की मांसपेशी के टिश्यू में शुरू होते हैं ।
वे गर्भाशय की कैविटी में, गर्भाशय की दीवार की मोटाई या पेट की गुहा में बढ़ सकते हैं ।
फाइब्रॉएड के लिए मेडिकल शब्द है- लेय्योमायोमा । फाइब्रॉएड शरीर में स्वाभाविक रूप से उत्पादित हार्मोन एस्ट्रोजन द्वारा उत्तेजना की प्रतिक्रियास्वरूप विकसित होते हैं ।
इनकी वृद्धि 20 साल की उम्र में दिख सकती है, लेकिन मीनोपोज के बाद ये सिकुड़ जाते हैं, जब शरीर एस्ट्रोजेन का बड़ी मात्रा में उत्पादन बंद कर देता है ।
डॉ । अग्रवाल ने आगे कहा कि फाइब्रॉएड का उपचार लक्षणों, आकार, उम्र और रोगी के सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता है । यदि कोई कैंसर पाया जाता है,
तो यह रक्तस्राव अक्सर हार्मोनल दवाओं द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है ।
कुछ खाद्य पदार्थ फाइब्रॉएड को बढ़ा सकते हैं । इसे रोकने के लिए संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थो को फाइब्रॉएड रोगियों को नहीं देना चाहिए ।
ये वसा एस्ट्रोजेन स्तर को बढ़ा सकते हैं, जिससे फाइब्रॉएड बड़ा हो सकता है । कैफीन युक्त पेय पदार्थ गर्भाशय फाइब्रॉएड होने पर नहीं लेना चाहिए ।
उच्च नमक वाले फूड्स अपने आहार से दूर रखें, क्योंकि वे आपके जिगर पर दबाव डालते हैं । जिगर विषाक्त पदार्थो को हटाने और हार्मोन संतुलन के लिए सबसे
अधिक जिम्मेदार अंग है ।
अगर आपकी रातों की नींद उड़ी हुई है तो यह आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है । लगातार कम सोने से भूलने की बीमारी हो सकती है ।
अगर आपकी रातों की नींद उड़ी हुई है तो यह आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है । लगातार कम सोने से भूलने की बीमारी हो सकती है ।
एक नए अध्ययन के अनुसार, दिमाग के ज्यादा सक्रिय रहने से अल्जाइमर रोग के लिए जिम्मेदार एमीलॉयड बीटा प्रोटीन ज्यादा उत्पन्न होता है ।
शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रोटीन का स्तर बढ़ने से दिमाग में कई बदलावों के आने की संभावना होती है जिससे भूलने की बीमारी डिमेंशिया हो सकती है ।
अमेरिका के सेंट लुई में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन के रैंडल बैटमैन ने कहा, ‘‘यह अध्ययन साफ तौर पर यह दिखाता है कि मनुष्यों को कम नींद आने से एमीलॉयड बीटा प्रोटीन ज्यादा पैदा होता है और इससे अल्जाइमर रोग होने का खतरा बढ़ जाता है ।’’
यह शोध एनल्स ऑफ न्यूरोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है । वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के लिए 30 से 60 वर्ष की आयु के बीच के आठ लोगों पर अध्ययन किया जो कम सोते थे या भूलने की समस्या से जूझ रहे थे ।
आपके बच्चे अगर स्मार्टफोन पर घंटों समय बिताते हैं, गेम खेलते रहते हैं और कम्प्यूटर या टैबलेट पर अधिक समय काम करते हैं, तो उनकी आंखों की रोशनी कमजोर पड़ने की संभावना ज्यादा रहती है ।
मगर चिंता छोड़िए और उन्हें खेलने के लिए बाहर भेजिए । विशेषज्ञों का कहना है कि
अगर बच्चे हर रोज कम से कम दो घंटे बाहर सूरज की रोशनी में खेलते हैं, तो उनकी आंखें कमजोर होने से बच सकती हैं ।
पेरेंट्स के लिए बच्चों को इन डिवाइस के इस्तेमाल से रोकना बड़ा काम है । इसमें विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को जितना हो सके, उतने अधिक समय के लिए बाहर खेलने के लिए लेकर जाएं ।
'बीबीसी हेल्थ'(BBC health) की रिपोर्ट के अनुसार, लंदन के किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर क्रिस हेमंड ने कहा कि हमें पता है कि आज के समय में बच्चों के बीच निकटदृष्टि दोष की समस्या आम बात हो गई है । उन्होंने कहा कि निकटदृष्टि दोष को रोकने का सही तरीका बाहर अधिक से अधिक समय बिताना है । इसमें दो घंटे बाहर बिताने से बच्चों में इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है । इसके साथ ही बच्चों को ओमेगा-3 की डाइट देना जरूरी है । इसके साथ ही उन्हें विटामिन-ए, सी और ई की भी जरूरत होगी, जो उनकी आंखों के लिए अच्छी होगी । विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें बच्चों की नियमित रूप से आंखों की जांच भी मददगार साबित हो सकती है ।
कैल्शियम (Calcium), विटामिन डी (vitamin D) या दोनों की दवाओं द्वारा बुजुर्गों के कूल्हे के या अन्य किसी फ्रेक्चर से बचने की संभावना कम है ।
एक रिसर्च में ये बात सामने आई है ।
कैल्शियम(Calcium), विटामिन डी (vitamin D) या दोनों की दवाओं द्वारा बुजुर्गों के कूल्हे के या अन्य किसी फ्रेक्चर से बचने की संभावना कम है ।
एक रिसर्च में ये बात सामने आई है ।
आपने कई बार मार्केट में रस्सी से बंधा हुआ ड्राई फ्रूट देखा होगा इसे अंजीर के नाम से जाना जाता है । ये देखने में तो बहुत अच्छा नहीं लगता लेकिन ये है बहुत फायदेमंद ।
आज डॉ शिखा शर्मा बता रही हैं अंजीर के फायदों के बारे में ।
महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है क्योंकि वे उम्र के साथ हड्डियों की समस्याओं से अधिक जूझती हैं.
लोगों में कैल्शियम की कमी भारी मात्रा में देखने को मिलती है. कैल्शियम की कमी आमतौर पर खानपान की बदलती आदतों के कारण होती है. खासतौर पर शहरी महिलाओं में. हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में शहरी महिलाओं के खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव आया है.
सुबह का नाश्ता यूं तो दिनभर फुर्तीला रहने के लिए करना चाहिए लेकिन आज हम आपको एक ऐसी वजह बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आप भी रोजाना नाश्ता किए बिना घर से नहीं निकलेंगे.
Benefits Of Eating Breakfast
सुबह का नाश्ता यूं तो दिनभर फुर्तीला रहने के लिए करना चाहिए लेकिन आज हम आपको एक ऐसी वजह बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आप भी रोजाना नाश्ता किए बिना घर से नहीं निकलेंगे.
जी हां, हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, सुबह का नाश्ता करने से आसानी से वजन कम किया जा सकता है.
हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, टाइप 2 डायबिटीज के दौरान कम से कम 10 में से एक मरीज के पैर में क्षति की आशंका देखी गई है. ऐसे में पैरों की देखभाल बहुत जरूरी है. चलिए जानते हैं डायबिटीज के दौरान कैसे करें पैरों की देखभाल.
आईएमए के अध्यक्ष डॉ के के अग्रवाल के मुताबिक,
दूध की बोतल से बच्चों के दांत खराब हो सकते हैं। माताओं को हर फीड के बाद एक साफ कपड़े से शिशुओं के मसूड़े और दांत पोंछने चाहिए। अगर अनदेखा छोड़ दिया जाए तो टीथ इंफेक्श़न से हृदय संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं
भारत में दांतों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। हाल ही में किए गए एक शोध से संकेत मिलता है कि लगभग 95% भारतीयों में मसूड़ों की बीमारी है,
50% लोग टूथब्रश का उपयोग नहीं करते और 15 वर्ष से कम उम्र के 70% बच्चों के दांत खराब हो चुके हैं।ऐसे में दांतों की देखभाल बहुत जरूरी है।
कैसे करें दांतों की देखभाल।
बोलते वक्त आपकी स्पीच में बार-बार रुकावट, फिलर शब्द या वर्बल चेंज जरूरत से ज्यादा हो तो ये मेंटल डिक्लाइन की निशानी हो सकती है और इससे अल्जाइमर रोग होने की संभावना हो सकती है।
क्या आप जानते हैं कि आपका बोलना आपकी मेंटल हेल्थ के बारे में बहुत कुछ बताता है। रिसर्च के मुताबिक बोलते वक्त आपकी स्पीच में बार-बार रुकावट,
फिलर शब्द या वर्बल चेंज जरूरत से ज्यादा हो तो ये मेंटल डिक्लाइन की निशानी हो सकती है और इससे अल्जाइमर रोग होने की संभावना हो सकती है।
यू एस (U S) के एक रिसर्चर ने 2 साल पहले लोगों को एक टेप सेशन में डिस्क्राइब किया था। और इसके नतीजों के मुताबिक जो लोग
अर्ली माइल्ड काग्निटिव इंपेरमेंट से पीड़ित होते है उनमें कम सोचने वाले लोग या जिनमें थिंकिॆग प्रॉब्लम नहीं होती उनकी तुलना से मानसिक गिरावट ज्यादा देखने को मिलती है।
यूनिवर्सेटी आफ विस्कोंसीमेडिसन के स्टडी लीडर स्ट्रेलिंग जॉनसन का कहना है कि इस स्टडी में पाता चला है कि मेमोरी प्रॉब्लम के साथ लेंग्वेज प्रॉब्लम के कारण
भी मानसिक गिरावट होता है। अब तक की मानसिक गिरावट के विषय में की गई स्पीच एनलिसिस( speech Analysis) सबसे बड़ी स्टडी मानी गई है
और अगर ये टेस्ट कन्फर्म होता है तो मेंटल डिक्लाइन की निशानियों से पहले इसका हल निकाल सकते हैं।
हालांकि जरूरत से ज्यादा चिंतित ना हो क्योंकि मेंटल डिक्लाइन उम्र के कारण भी होता है जिसमें भी चीजें याद नहीं रहती है।
वर्कआउट किस सोच के साथ कर रहे हैं इसका बहुत इफेक्ट पड़ता है।
हेल्दी और फिट रहने के लिए रोज वर्कआउट करना बहुत जरूरी होता है एक्सरसाइज के लिए कोई जिम जाता है तो कोई स्पोटर्स करता है तो कोई पार्क में दौड़ता है लेकिन हाल ही में आई रिसर्च में पता चला है कि ज्यादातर लोग ये मानते हैं कि एक्सरसाइज करने से बहुत थकावट होती है और स्पोटर्स में उससे भी ज्यादा मेहनत लगती है
यूनिवर्सिटी आफॅ फ्रीबर्ग के रिर्सचर हेंड्रिक मोथ्स का कहना है कि ये लोगों पर डिपेंड करता है कि उनकी एक्सपेक्टेशन क्या है वे वर्कआउट के लिए क्या विकल्प चुन रहे हैं और उसे कितना समय दे रहे हैं। साथ ही वे किस सोच के साथ वर्कआउट शुरू कर रहे हैं
रिसर्च के दौरान, 18 से 32 उम्र के 78 पुरुषों और महिलाओं को शामिल किया गया। स्टडी के दौरान उनको 30 मिनट तक साइक्लिंग करने के लिए कहा गया। वर्कआउट शुरू करवाने से पहले सबसे पूछ लिया गया कि वे कितनी देर तक वर्कआउट करने में सक्षम है। इतना ही नहीं, साइक्लिंग से पहले प्रतिभागियों को साइक्लिंग के हेल्थ बेनिफिट्स और उसके पॉजिटिव फैक्ट्स पर एक फिल्म भी दिखाई गई।
रिसर्च के नतीजों में पाया गया कि जिन लोगों ने पॉजिटीव एटीट्यूट के साथ वर्कआउट करना शुरू किया वे कम तनाव में थे।
मैक्रोनी और चीज़ पाउडर में ज्यादा मात्रा में खतरनाक कैमिक्लस होते हैं जिन्हें फथलेट्स कहा जाता है, ये प्लासटिक को मुलायम बनाने के काम आता है।
powder
क्या आप भी मैक्रोनी और चीज़ के दीवाने हैं? क्या आप अपने बच्चों को मैक्रोनी और चीज़ खिलाते हैं? अगर हां, तो सावधान। जी हां, हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, ऐसा करके आप अपनी और बच्चों की सेहत को खतरे में डाल रहे हैं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि एक रिसर्च में ये बात सामने आई है।
डॉक्टर्स का मानना है कि H1N1 बच्चों के रेस्पिरेटरी सिस्टम के साथ ही उनके दिमाग को भी इफेक्ट कर रहा है।
मुबंई में एक 10 महीने का बच्चा अपने जान-पहचान के लोगों यहां तक की अपने पेरेंट्स तक को पहचान नहीं पा रहा है। इसका कारण H1N1 वायरस माना जा रहा है जो ब्रेन को इफेक्ट कर रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स का मानना है कि H1N1 बच्चों के रेस्पिरेटरी सिस्टम के साथ ही उनके दिमाग को भी इफेक्ट कर रहा है।
पिछले एक महीने में पेड्रियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट ने H1N1 वायरस से पीडित कम से कम 5-6 ऐसे बच्चों का ट्रीटमेंट किया है
जो फीवर, कोल्ड, थ्रोट इंफेक्शन के साथ ही दिमागी समस्याओं से पीडित हैं।
न्यूरो एक्सपर्ट इस बात पर जोर देते हुए सलाह दे रहे हैं कि H1N1 का इलाज करने के दौरान डॉक्टर्स को ब्रेन में होने वाली सूजन या फिर अचानक पड़ने वाले दौरे के बारे में खासतौर पर सोचना चाहिए और साथ ही बच्चे को जरूरत पड़ने पर वेंटिलेशन और आई सी यू (ICU)में रखें।
इस सबंध में एबीपी न्यू्ज़ को न्यूरो सर्जन विकास भारद्वाज ने बताया कि इस समय H1N1 वायरस बच्चों के दिमाग को बहुत इफेक्ट कर रहा है इसका कारण बताते हुए डॉ। का कहना है कि एच1एन1 वायरस न्यूरोट्रॉपिक वायरस हैं जो कि बॉडी के न्यूरल स्ट्रक्चर जैसे :: नर्वस, ब्रेन उन पर अटैक कर उनसे बॉडी में एंटर करते हैं। इन्सेफेलाइटिस नामक ये वायरस बच्चों को सबसे ज्यादा इफेक्ट करता है क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम इतना स्ट्रांग नहीं होता कि वो किसी भी वायरस से अचानक लड़ पाए।
H1N1 सेंट्रल नर्वस सिस्टम का इंफेक्शन है जिससे ब्रेन के फंक्शंस डिस्टर्ब हो जाते हैं। इससे बच्चों में दौरे पड़ने लगते हैं। बच्चे की याददाश्त जा सकती है। इन्सेफेलाइटिस की वजह से बच्चे़ के ब्रेन में सूजन आ जाती है। बच्चों के हायर मेंटल फंक्शंस सबसे पहले प्रभावित होते हैं। इसके बाद बाकी बॉडी फंक्शंस पर धीरे-धीरे इफेक्ट होने लगता है। आई, ईयर, वीकनेस जैसी चीजें अधिक सूजन बढ़ने पर आती है। स्पीच पर भी फर्क आ सकता है। बेहोशी की हालत होने लगती है। कम बोलना शुरू होना आता है।
आपको बता दें, इस साल महाराष्ट्र में H1N1 तेजी से फैल रहा है और अब तक 300 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, अधिक घंटों तक काम करने से दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है।
Long working days can cause heart problems, study says
क्या आप भी ऑफिस में देर तक काम करते हैं? क्या आपके काम के घंटे बढ़ गए हैं? अगर हां तो आपको सावधान होने की जरूरत है। जी हां, ऐसा होने से आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
क्या आप जानते हैं डाइटिंग करना सिर्फ कुछ ही समय के लिए लाभदायक होता है.
How crash diets harm your health
आज के दौर में डाइटिंग करना बहुत से लोगों के लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है. कोई अपनी डायट में ग्लूटन बैन करता है तो कोई शुगर. लेकिन क्या आप जानते हैं डाइटिंग करना सिर्फ कुछ ही समय के लिए लाभदायक होता है. रिसर्च में माना गया है कि डाइटिंग करके वजन घटाने वाले लोगों का वजन कुछ ही साल में उतना ही बढ़ जाता है जितना की वो घटाते हैं.
डायटिशियन एंडी बेलाटी और एक्सरसाइज साईंटिस्ट फिलिप स्टेनफोर्थ का कहना है कि डाइट में कोई भी परिवर्तन लाने से पहले सिर्फ एक रूल को फोलो करें जिसे आप अपनी पूरी जिंदगी भर के लिए लागू कर सकते है. जो कोई भी वजन घटाने के लिए एक हफ्ते का क्रैश डाइट करता है कुछ ही महीने बाद उसका वजन डबल हो जाता है. इसलिए डायटिशियन सुझाव देते है कि डायट में कोई भी परिवर्तन ला रहे हैं तो उसे कम से कम दो से चार साल तक जारी रखें. हेल्दी रहने के लिए डायट में बदलाव कर रहे हैं तो अपनी डायट में सब्जियां ज्यादा शामिल करें. कोशिश करें कि अधिक से अधिक वॉक करें. शुगर ड्रिंक्स, सोडा ड्रिंक्स एवॉइड करें
देश में हर साल करीब 40,000 से 50,000 लोगों में ब्रेन ट्यूमर (brain tumour) की पहचान होती है, जिनमें से 20% बच्चे होते हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( IMA ) का कहना है कि देश में हर साल करीब 40,000 से 50,000 लोगों में ब्रेन ट्यूमर (brain tumour) की पहचान होती है, जिनमें से 20% बच्चे होते हैं। चिंता की बात यह है कि पिछले साल ये आंकड़ा केवल 5% ही ऊपर था। साथ ही, हर साल लगभग 2,500 भारतीय बच्चों में मेडुलोब्लास्टोमा रोग पाया जा रहा है।
आईएमए(IMA) के अध्यक्ष डॉ। के। के। अग्रवाल का कहना है कि मस्तिष्क क्षति किसी भी उम्र में हो सकती है और यह एक गंभीर समस्या है। इससे सोचने, देखने और बोलने में समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। ब्रेन ट्यूमर का एक छोटा सा हिस्सा आनुवंशिक विकारों से जुड़ा हुआ है। बाकी लोगों को यह किसी विषाक्त पदार्थ के सेवन, मोबाइल तरंगों जैसी किसी अन्य कारण से भी हो सकता है।

हाल ही में आई एक रिसर्च के मुताबिक, जिन बच्चों का जन्म के समय वजन ज्यादा होता है उनके बाद में मोटे होने की आशंका अधिक होती है।
ब्लड डोनेट(Blood Donate) करने से पहले कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। आज हम आपको बता रहे हैं रक्तदान से पहले किन चीजों का ध्यान रखें।
Blood Donation Tips: Before, During & After
ब्लड डोनेट(Blood Donate) तब होता है जब एक हेल्दी व्यक्ति स्वेच्छा से अपना रक्त देता है और ट्रांसफ्यूजन के लिए उसका उपयोग होता है या फ्रैकशेनेशन नामक प्रक्रिया के जरिये दवा बनाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं ब्लड डोनेट(Blood Donate) करने से पहले कई बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। आज हम आपको बता रहे हैं रक्तदान से पहले किन चीजों का ध्यान रखें।
ब्लड डोनेट(Blood Donate) करने से पहले कुछ टेस्ट किए जाते हैं। इन टेस्ट के जरिए जाना जाता है कि ब्लड डोनर का ब्लड ग्रुप क्या है। डोनर (DONNER)को हिपेटाइटिस बी, सी वायरस( C VIRUS), एचआईवी (HIB), वीडीआरएल (BDRL), मलेरिया जैसी कोई गंभीर समस्या ना हो। इसके अलावा माइनर ब्लड ग्रुप और न्यूक्लिक एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्ट भी किए जाते हैं।व्यक्ति का ब्लडप्रेशर, हीमोग्लोबिन, और वेट स्टेबल हो तभी उसे ब्लड डोनेट (Blood Donate)करने देना चाहिए।ब्लड डोनेट करने से पहले कुछ खा लें। इससे तकरीबन 24 घंटे पहले शराब या धूम्रपान का सेवन ना करें। खूब पानी पीएं। इससे आपके शरीर में रक्तदान के बाद पानी की कमी नहीं होगी। सोडा ड्रिंक ना लें।ब्लड डोनेशन(Blood Donate) के तुरंत बाद अधिक मेहनत वाला कोई काम न करें।
एकाग्रता में कमी से संबंधित 'हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर' (एडीएचडी) होता है। हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक, इस डिस्ऑर्डर को नींद का पैटर्न ठीक कर सही किया जा सकता है।
could be key to treating ADHD: study
अक्सर देखा गया है कि बच्चे जल्दी से चीजों पर फोकस नहीं कर पाते। क्या आप जानते हैं फोकस की कमी होना एक समस्या है। जी हां, एकाग्रता में कमी से संबंधित हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर (ADHD) होता है।
हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक इस डिस्ऑर्डर को नींद का पैटर्न ठीक कर सही किया जा सकता है।
आजकल के लाइफस्टाइल में बैड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ना आमबात है। बैड कॉलेस्ट्रॉल के बढ़ने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। एक्सपर्ट की मानें तो हाई कॉलेस्ट्रॉल ओवरऑल सेहत के लिए नुकसानदायक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ सुपरफूड्स के जरिए आप आसानी से कॉलेस्ट्रॉल कम कर सकते हैं।